G-Z76GJ3VQ65 google-site-verification=W_bCfRqm-7eEfZBB6vSer72kEdpHDdfo3Yo0LPoPog0 झारखंड के चाईबासा अस्पताल में लापरवाही! संक्रमित रक्त से पांच बच्चों में HIV, हाईकोर्ट ने तलब की रिपोर्ट - BAHORA NEWS

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झारखंड के चाईबासा अस्पताल में लापरवाही! संक्रमित रक्त से पांच बच्चों में HIV, हाईकोर्ट ने तलब की रिपोर्ट

 

चाईबासा सदर अस्पताल ब्लड-बैंक, जांच जारी
  • मामला सामने हुआ जब एक लगभग 7 साल के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के परिवार ने आरोप लगाया कि उसे अस्पताल के ब्लड-बैंक से संक्रमित रक्त चढ़ाया गया। 

  • इसके बाद राज्य स्वास्थ्य निदेशक दिनेन्द्र कुमार (रांची) की अगुवाई में 5 सदस्यों की टीम को जांच के लिए भेजा गया।

  • जांच के दौरान चार और थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई, जिससे कुल संक्रमित बच्चों की संख्या पाँच हो गई। 

  • प्रारम्भिक तह में टीम ने अस्पताल के ब्लड बैंक एवं पीआईसीयू (पेडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) का निरीक्षण किया, जहाँ कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं — रक्त परीक्षण, रिकॉर्ड रखरखाव, सुरक्षा प्रोटोकॉल में लापरवाही। 

  • ब्लड बैंक को आपातकालीन मोड में रखा गया है और वर्तमान में केवल गंभीर मरीजों को ही सेवा दी जा रही है। 

  • यह मामला अब झारखण्ड हाई कोर्ट तक पहुँच गया है, जिसने राज्य स्वास्थ्य सचिव व सिविल सर्जन से रिपोर्ट तलब की है। 

  • प्रशासन ने सभी संबंधित रक्तदाताओं की जांच भी करने का आदेश दिया है ताकि संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके। 


किन प्रश्नों का सामना करना होगा

1. रक्त-प्रदान एवं ब्लड-बैंक सुरक्षात्मक उपाय

  • क्या ब्लड बैंक में HIV सहित अन्य संक्रामक बीमारियों की सर्व-स्क्रीनिंग ठीक तरह से हो रही थी?

  • रक्त की यूनिट्स का ट्रैक रखा गया था या नहीं; रिकॉर्ड में लापरवाही क्यों हुई?

  • आईसोलेटेड थैलेसीमिया बच्चों को नियमित ट्रांसफ्यूजन देना होता है — वहाँ विशेष दिशा-निर्देश हैं, क्या उनका पालन हुआ?

2. अनियमितताओं का दायरा

  • जांच में मिली लापरवाहियों में क्या-क्या पाया गया: परीक्षण दिशा-निर्देशों के उल्लंघन, रिकॉर्ड का अभाव, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न होना। 

  • क्या पूर्व में ऐसी शिकायतें आई थीं? ब्लड बैंक के संचालन-प्रबंधन का ऑडिट कब हुआ था?

3. परिवारों व प्रभावित बच्चों की हालत

  • इन बच्चों को अब क्या चिकित्सा-सुविधा मिलेगी? HIV- पॉजिटिव पाए जाने के बाद तत्काल एवं दीर्घकालीन चिकित्सा योजना क्या होगी?

  • प्रभावित परिवारों का मानसिक-सामाजिक समर्थन किस तरह सुनिश्चित किया जा रहा है?

4. प्रशासनिक व न्यायिक पहल

  • राज्य स्वास्थ्य विभाग ने दोषियों की पहचान, जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की है।

  • कोर्ट-मामले में क्या दिशा-निर्देश आएँगे? भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए ब्लड-सुरक्षा-प्रणाली में किस तरह सुधार होगा?


सामाजिक व नैतिक आयाम

यह घटना सिर्फ चिकित्सा-लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सामाजिक समस्या भी है — कभी-कभी चिकित्सा सेवा में भरोसा टूट जाता है। बच्चों के साथ ऐसा होना विशेष रूप से चिंताजनक है।

  • थैलेसीमिया जैसे रोग में जहाँ बच्चे को जीवन-पर्यन्त ट्रांसफ्यूशन की ज़रूरत होती है, वहाँ सुरक्षा की कमियों ने भरोसे को क्षति पहुँचाई।

  • प्रभावित परिवारों को अब न केवल चिकित्सा बल्कि सामाजिक-आर्थिक रूप से भी मजबूत किया जाना चाहिए।

  • अस्पताल-व ब्लड बैंक-पर निर्भर लोग अब पहले से ज़्यादा सतर्क होंगे — यह घटना एक चेतावनी है कि स्वास्थ्य-सेवा प्रणालियों को सतत् निरीक्षण और जवाबदेही के साथ चलाना होगा।


भविष्य की दिशा-निर्देश

  • ब्लड बैंक एवं अस्पतालों में नियमित सुरक्षा ऑडिट, इनफेक्शन-कंट्रोल चेक, रिकॉर्ड-मेनेजमेंट अनिवार्य हों।

  • थैलेसीमिया व अन्य बार-बार ट्रांसफ्यूजन लेने वाले रोगियों के लिए विशेष निगरानी प्रणाली लागू हो।

  • स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित-परिवारों के लिए नि:शुल्क चिकित्सा व परामर्श सुविधा तुरंत उपलब्ध करनी चाहिए।

  • राज्य एवं जिला-स्तर पर एक निगरानी-कमीटी बनाई जाए जो ब्लड बैंक प्रमाण-पत्र, परीक्षण-रिपोर्ट, डोनर-ट्रेसिंग रिकॉर्ड आदि की जांच करती हो।

  • कानूनी कार्रवाई तेज की जाए ताकि दोषियों को समय पर दंड मिल सके और भविष्य में इस तरह की घटना से अन्य मरीज सुरक्षित रहें।


✍️ Writer -RITESH YADAV 

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