दुबई में दिवाली की रात भारतीय युवक की मौत — गोल्डन वीजा धारक वैष्णव कृष्णकुमार का हार्ट अटैक से निधन
दुबई में दिवाली के रंगों के बीच एक दर्दनाक हादसे ने भारतीय समुदाय को झकझोर दिया।
18 वर्षीय भारतीय छात्र वैष्णव कृष्णकुमार, जो दुबई की मिडिलसेक्स यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहा था, दिवाली समारोह के दौरान अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, उसकी दिल की धड़कन अचानक रुक गई (Cardiac Arrest) थी।
गोल्डन वीजा धारक भारतीय छात्र
वैष्णव कृष्णकुमार उन कुछ भारतीयों में से एक था जिसे यूएई का गोल्डन वीजा मिला हुआ था —
यह वीजा आमतौर पर उन लोगों को दिया जाता है जिनकी उपलब्धियाँ या प्रतिभाएँ खास होती हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वैष्णव न केवल एक होनहार छात्र था बल्कि वह सामाजिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था।
उसके परिवार का कहना है कि वह पढ़ाई के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी काफी सक्रिय रहता था।
दिवाली की रात भी वह यूनिवर्सिटी के फेस्टिव इवेंट में शामिल हुआ था।
⚡ हादसे की पूरी कहानी
यह घटना मिडिलसेक्स यूनिवर्सिटी दुबई कैंपस के अंदर दिवाली कार्यक्रम के दौरान हुई।
सैकड़ों स्टूडेंट्स नाच-गाने और लाइटिंग के बीच जश्न मना रहे थे।
इसी बीच, वैष्णव स्टेज के पास खड़ा था जब अचानक वह ज़मीन पर गिर पड़ा।
आसपास मौजूद दोस्तों ने तुरंत एंबुलेंस बुलवाई।
उसे पास के अल बरशा मेडिकल सेंटर ले जाया गया।
लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उसकी दिल की धड़कन पहले ही रुक चुकी थी।
🏥 अस्पताल और पुलिस का बयान
डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि यह Cardiac Arrest (Heart Failure) का मामला है।
हालांकि, इतने कम उम्र में हार्ट अटैक होना असामान्य माना जा रहा है।
इसलिए दुबई पुलिस का फोरेंसिक विभाग अब इस पूरे मामले की जांच कर रहा है।
एक अधिकारी के मुताबिक:
“हम यह पता लगा रहे हैं कि घटना के समय छात्र ने क्या खाया, क्या वह किसी दवा पर था या उसे पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या थी।”
💔 परिवार में मातम
वैष्णव के पिता कृष्णकुमार और माँ रमा देवी दोनों दुबई में ही रहते हैं।
पिता एक आईटी प्रोफेशनल हैं जबकि माँ गृहिणी हैं।
उनका कहना है कि उनका बेटा एकदम स्वस्थ था और कभी कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई।
माँ रमा देवी ने मीडिया से बात करते हुए कहा —
“दिवाली की सुबह उसने हमें वीडियो कॉल किया था। वो बहुत खुश था। हमें नहीं पता था कि वही हमारी आखिरी बात होगी।”
परिवार ने भारतीय दूतावास से संपर्क कर शव को भारत लाने की अनुमति मांगी है।
🕊️ भारतीय दूतावास का बयान
दुबई स्थित भारतीय दूतावास ने इस घटना पर शोक जताते हुए कहा है कि वे परिवार को हर संभव मदद देंगे।
दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा:
“हम स्थानीय प्रशासन और यूनिवर्सिटी से समन्वय में हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद अंतिम प्रक्रिया पूरी की जाएगी।”
🌠 दिवाली की खुशी में मातम
दुबई में भारतीय समुदाय ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया है।
कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह “दिवाली की सबसे काली रात” थी।
कई लोगों ने परिवार के लिए प्रार्थना और संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
मिडिलसेक्स यूनिवर्सिटी ने भी अपने आधिकारिक अकाउंट से पोस्ट किया —
“हमारे प्रिय छात्र वैष्णव कृष्णकुमार की असमय मृत्यु ने हम सभी को गहराई से दुखी किया है। हमारी संवेदनाएँ उनके परिवार के साथ हैं।”
❤️ क्या युवाओं में हार्ट अटैक बढ़ रहे हैं?
डॉक्टरों का कहना है कि हाल के वर्षों में 18–30 आयु वर्ग के युवाओं में भी कार्डियक अरेस्ट के मामले बढ़े हैं।
इसकी वजह —
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मानसिक तनाव
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अनियमित दिनचर्या
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जंक फूड
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कम नींद
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और लगातार स्क्रीन टाइम
डॉक्टरों का यह भी कहना है कि दिवाली जैसे मौकों पर अत्यधिक एक्साइटमेंट और कैफीन सेवन से भी अचानक हार्ट की गति रुक सकती है।
🔬 विशेषज्ञों की राय
डॉ. मोहम्मद अली (Cardiologist, Dubai Heart Center) ने कहा —
“कई बार युवाओं में छिपी हुई हार्ट कंडीशन होती है जो कभी जांच में सामने नहीं आती।
स्ट्रेस या तेज रोशनी, भीड़ और नाच-गाने जैसी स्थिति में वह ट्रिगर हो जाती है।”
⚰️ अंतिम संस्कार की तैयारी
परिवार की इच्छा है कि वैष्णव का अंतिम संस्कार भारत में, उसके गृह नगर केरल में किया जाए।
भारतीय समुदाय के सदस्य सहयोग के लिए आगे आए हैं।
भारतीय काउंसिल ने कहा है कि सभी आवश्यक दस्तावेज और अनुमतियाँ शीघ्र जारी की जाएँगी।
📱 सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
वैष्णव के इंस्टाग्राम अकाउंट पर अब शोक संदेशों की भरमार है।
उसकी आखिरी पोस्ट में लिखा था —
“दिवाली सिर्फ रोशनी नहीं, उम्मीद भी देती है।”
इस पोस्ट पर सैकड़ों लोग RIP कमेंट कर रहे हैं।
कई यूज़र्स ने लिखा —
“इतनी छोटी उम्र में ये हादसा दिल तोड़ देने वाला है।”
🕊️ निष्कर्ष
दुबई में दिवाली जैसे खुशी के मौके पर हुई यह मौत पूरे भारतीय प्रवासी समाज के लिए एक चेतावनी बन गई है।
यह दिखाता है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता कितनी ज़रूरी है, चाहे हम कितने भी व्यस्त या सफल क्यों न हों।
वैष्णव कृष्णकुमार की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए सबक है जो विदेशों में बेहतर भविष्य की तलाश में हैं —
कि ज़िंदगी की कीमत किसी भी उपलब्धि से बढ़कर है।


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