G-Z76GJ3VQ65 google-site-verification=W_bCfRqm-7eEfZBB6vSer72kEdpHDdfo3Yo0LPoPog0 छठ पूजा: सूर्य उपासना का पवित्र पर्व – पुतुर स्कूल में होगा भव्य आयोजन - BAHORA NEWS

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छठ पूजा: सूर्य उपासना का पवित्र पर्व – पुतुर स्कूल में होगा भव्य आयोजन


पुतुर स्कूल में छठ पूजा का भव्य आयोजन, जय मां काली कमिटी द्वारा देवी जागरण, दीपक प्रताप देव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित, श्रद्धालु सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते हुए

भारत की धरती अपनी समृद्ध परंपराओं और आस्थाओं के लिए जानी जाती है। इन्हीं महान पर्वों में से एक है — छठ पूजा, जो न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि इसका एक वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व भी है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है।

छठ पूजा के दिन सूर्य देवता और छठी मैया की आराधना की जाती है, ताकि जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य, समृद्धि और संतान सुख बना रहे।
बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र में यह पर्व बड़े उत्साह, अनुशासन और आस्था के साथ मनाया जाता है।


🌅 छठ पूजा क्यों मनाई जाती है?

छठ पूजा केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, जल, वायु और सूर्य के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है।

  1. सूर्य देव की उपासना:
    सूर्य को सभी जीवन का आधार माना गया है। उनकी ऊर्जा के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं।
    छठ पूजा में जब श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देते हैं, तो वे दरअसल जीवन और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करते हैं।

  2. छठी मैया की पूजा:
    छठी मैया यानी ऊषा और प्रत्युषा देवी, जो भोर और संध्या की देवी मानी जाती हैं।
    ऐसा विश्वास है कि छठी मैया मां और बच्चे दोनों की रक्षा करती हैं और परिवार को सुख, स्वास्थ्य और शांति प्रदान करती हैं।

  3. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से:
    छठ पूजा के दौरान जब लोग उपवास रखते हैं, नदी या तालाब के किनारे सूर्य की किरणों में खड़े होते हैं, तो इससे शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन (शुद्धिकरण) होता है।
    कार्तिक महीने में सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें शरीर को लाभ देती हैं, जिससे त्वचा और स्वास्थ्य बेहतर होता है।

  4. धार्मिक कथा के अनुसार:
    महाभारत काल में जब पांडवों ने सब कुछ खो दिया था, तब माता द्रौपदी ने छठ व्रत रखा था, जिसके प्रभाव से उन्हें अपना राज्य वापस मिला।
    वहीं, एक अन्य कथा के अनुसार भगवान राम और माता सीता ने अयोध्या लौटने के बाद छठ व्रत रखा था, ताकि उनके जीवन में सुख और संतुलन बना रहे।


🪔 छठ पूजा के चार पवित्र दिन

यह पर्व चार दिनों तक चलता है, और हर दिन का अपना धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है।

  1. नहाय–खाय (पहला दिन):
    इस दिन व्रती घर की शुद्धि करते हैं और शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं।
    इसे आत्मिक और शारीरिक शुद्धि का प्रारंभ माना जाता है।

  2. खरना (दूसरा दिन):
    व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को गुड़-चावल की खीर और दूध का प्रसाद ग्रहण करते हैं।
    खरना का प्रसाद अत्यंत पवित्र माना जाता है।

  3. संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन):
    व्रती सूर्यास्त के समय नदी, तालाब या घाट पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
    इस क्षण का दृश्य पूरे वातावरण को भक्ति और शांति से भर देता है।

  4. प्रातः अर्घ्य (चौथा दिन):
    सूर्योदय के समय उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है।
    यह क्षण व्रती के लिए सबसे पवित्र और भावनात्मक होता है।


🎉 पुतुर स्कूल में छठ पूजा का भव्य आयोजन

पुतुर स्कूल में छठ पूजा का भव्य आयोजन

इस वर्ष छठ पूजा के पावन अवसर पर पुतुर स्कूल परिसर में एक भव्य धार्मिक आयोजन किया जा रहा है, जो पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
इस आयोजन में जय मां काली कमिटी की ओर से शानदार देवी जागरण का कार्यक्रम रखा गया है।

🌺 मुख्य अतिथि:

कार्यक्रम में माननीय दीपक प्रताप देव जी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
उनकी उपस्थिति से पूरे आयोजन में आध्यात्मिकता और उत्साह का वातावरण बनेगा।


🕉️ देवी जागरण का विशेष आकर्षण

जय मां काली कमिटी के सदस्य —
आलोक यादव, अभिमन्यु यादव, श्रीकांत यादव, अर्पण यादव, अवनीश यादव, नित्यानंद यादव और शिशुपाल यादव, मुकेश यादव,
इस पूरे कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं।

इन सभी ने अपने अथक प्रयासों और भक्ति भाव से इस आयोजन को सफल बनाने की जिम्मेदारी उठाई है।

देवी जागरण का संचालन करेंगे पूर्व शिक्षक श्री श्याम सुंदर यादव जी, जिनकी मधुर वाणी और भक्ति गीतों से पूरा माहौल देवीमय हो उठेगा।

देवी जागरण का कार्यक्रम कल शाम 7 बजे से प्रारंभ होगा, जिसमें क्षेत्र के हजारों भक्तों के शामिल होने की संभावना है।


🌕 भक्ति, संगीत और आस्था का संगम

देवी जागरण में मां काली, मां दुर्गा, और छठी मैया के भजन गाए जाएंगे।
शाम से लेकर देर रात तक गूंजेगा —

“जय छठी मइया! जय मां काली!”

मंच पर भक्तिगीतों की प्रस्तुति के साथ-साथ आध्यात्मिक नृत्य, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे, जो लोगों को भक्ति और आनंद से भर देंगे।


💫 छठ पूजा का सामाजिक संदेश

छठ पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह पर्यावरण और पारिवारिक एकता का उत्सव है।
इस पर्व के जरिए लोग नदी, जलाशय और प्रकृति की सफाई का भी संदेश देते हैं।
यह पर्व हमें सिखाता है कि

“प्रकृति और मनुष्य का संबंध सबसे पवित्र बंधन है।”

व्रत रखने वाले पुरुष और महिलाएं (व्रती) कई दिनों तक अनुशासन, संयम और आत्म-शुद्धि के मार्ग पर चलते हैं।
उनका यह तप और श्रद्धा हमारे समाज में त्याग और समर्पण की मिसाल पेश करता है।


🌸 पुतुर स्कूल आयोजन की विशेषताएँ

  • सजावट में दीप, केले के पत्ते, फूलों की झालर और रंगोली का प्रयोग होगा।

  • पूरे आयोजन स्थल को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से सजाया जाएगा

  • सुरक्षा और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की गई है।

  • स्थानीय कलाकारों द्वारा भक्ति संगीत और नृत्य प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी।

  • अंत में सामूहिक प्रसाद वितरण होगा, जिसमें सभी भक्तों को प्रसाद मिलेगा।


🕊️ आस्था से उठेगा हर दीप

छठ पूजा के अवसर पर जब व्रती घाटों पर दीप जलाते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे हर दीप में एक कामना जल रही हो — परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि की।
पुतुर स्कूल में आयोजित यह छठ पर्व भी इस भाव से भरा होगा —
जहाँ आस्था, एकता और भक्ति तीनों मिलकर एक दिव्य वातावरण बनाएँगे।


📢 संदेश आमंत्रण

जय मां काली कमिटी की ओर से यह हार्दिक आमंत्रण है कि सभी भक्तजन, माताएं, बहनें और भाई —
कल शाम 7 बजे से पुतुर स्कूल परिसर में आयोजित देवी जागरण में सपरिवार उपस्थित हों।
आइए, मिलकर इस पावन पर्व को सफल बनाएं और छठी मैया से आशीर्वाद प्राप्त करें।


🙏 जय छठी मइया! जय मां काली!

पुतुर स्कूल का यह आयोजन न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह हमारे समाज की एकता, भक्ति और संस्कृति का प्रतीक है।
जब हजारों दीप एक साथ जलेंगे, भक्तगण छठ गीत गाएंगे, और सूर्य देव को अर्घ्य देंगे —
तो पूरा वातावरण यह संदेश देगा कि

“जहाँ आस्था है, वहाँ प्रकाश है — जहाँ श्रद्धा है, वहाँ छठी मैया हैं।”


लेखक  :- रितेश यादव की ओर से शुभकामनाएँ:

🌞 “छठी मैया सबके घरों में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद बरसाएँ।”
🌺 “जय छठी मइया — जय मां काली।”



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