मुलायम सिंह यादव — श्रद्धांजलि एवं जीवन परिचय
श्रद्धांजलि और सम्मान
उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री, राष्ट्र की रक्षा की धरोहर, समाजवाद के आदर्श पुरोधा एवं समाजवादी पार्टी के संस्थापक — श्रद्धेय मुलायम सिंह यादव जी — की आज की पुण्यतिथि पर मेरे हार्दिक श्रद्धांजलि एवं सादर नमन।
आपने अपने समस्त राजनीतिक जीवन में सामाजिक न्याय, समानता और सौहार्द के लिए जो अथक संघर्ष किया, वह वंचितों और उपेक्षितों को आज भी आत्मबल और प्रेरणा देता है। आपके आदर्श और सिद्धांत हमारे पथप्रदर्शक बने रहेंगे।
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| Image credit:- socialist_akhileshyadav instagram handle |
जीवन परिचय
आरंभिक जीवन और शिक्षा
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मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवंबर 1939 को सैफई, जनपद Etawah, उत्तर प्रदेश में हुआ।
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माता का नाम मूर्ति देवी, पिता का नाम सुघर सिंह यादव।
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बचपन से ही उन्होंने कठिन साधारण जीवन देखा; गाँव में जल, पक्की सड़क, बिजली जैसी सुविधाएं कम थीं।
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उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में हासिल की और बाद में Agra University से राजनीतिक विज्ञान में मास्टर्स (M.A.) की उपाधि ली।
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प्रारंभ में उन्होंने विद्यालय में प्राध्यापक (शिक्षक) के रूप में भी सेवाएँ दीं।
राजनीतिक यात्रा एवं संघर्ष
आरंभिक राजनीति
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1967 में उन्होंने पहली बार विधान सभा चुनाव लड़ा और जयसवंतनगर (Jaswantnagar) से विधायक निर्वाचित हुए।
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बाद में वे Samyukta Socialist Party से जुड़े और समाजवादी विचारधारा से प्रभावित हुए।
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1975–1977 की आपातकाल (Emergency) के दौरान उन्हें विपक्षी नेताओं के रूप में गिरफ्तार किया गया और लगभग 19 महीने जेल में रहे।
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1977 के बाद, जनता पार्टी और लोकदल की राजनीति में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री के कार्यकाल
मुलायम सिंह यादव तीन बार मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश बने:
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पहली पारी (1989–1991)
— वे 1989 में मुख्यमंत्री बने, जब जनता दल ने राज्य में सरकार बनाई।
— 1990 में, राम जन्मभूमि आंदोलन एवं बाबरी मस्जिद विवाद के दौरान उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को स्वीकार किया, जिससे आलोचना भी हुई।
— बाद में कांग्रेस समर्थन हटाने पर सरकार गिर पड़ी। -
दूसरी पारी (1993–1995)
— दिसंबर 1992 में उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) का गठन किया।
— 1993 में SP ने सफल चुनाव लड़ा और गठबंधन सरकार बनी, जिसमें मुलायम मुख्यमंत्री बने।
— लेकिन 1995 में बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने गठबंधन तोड़ दिया और सरकार आयी-गयी रही। -
तीसरी पारी (2003–2007)
— 2002 विधान सभा चुनाव में SP को बहुमत नहीं मिला, लेकिन राजनीतिक समायोजन के बाद दिसंबर 2003 में उन्होंने फिर मुख्यमंत्री पद संभाला।
— इस कार्यकाल में उन्होंने विभिन्न योजनाएँ शुरू कीं और पिछड़े वर्गों, किसानों, महिला शिक्षा आदि पर ध्यान केंद्रित किया।
— 2007 के चुनाव में उनकी सरकार को हार का सामना करना पड़ा।
राष्ट्रीय राजनीति एवं रक्षा मंत्री
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1996 में, जब SP केंद्र की गठबंधन सरकार का हिस्सा बना, मुलायम जी को रक्षा मंत्री बनाया गया।
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उन्होंने इस पद पर रहते हुए रक्षा से जुड़े मामलों में योगदान दिया।
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वे 7 बार लोक सभा सांसद रहे, विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों से।
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उन्होंने विधान सभा में 10 बार विधायक के रूप में सेवा की।
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वे विधान परिषद (UP Legislative Council) में भी सदस्य रहे और विपक्षी नेता बने।
सामाजिक विचार, नीतियाँ और विशेष योगदान
समाजवाद और सामाजिक न्याय
मुलायम सिंह यादव को समाजवादी विचारधारा का प्रबल समर्थक माना जाता था।
उन्होंने विशेष रूप से पिछड़े वर्गों, दलितों, अल्पसंख्यकों और किसानों की आवाज़ उठाई।
उन्होंने सरकारों में आरक्षणों का समर्थन किया और वंचितों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य एवं स्वरोजगार योजनाएँ लाई।
संस्थागत विकास
उनके सुझावों और बढ़ावा से कई मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय और इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ उत्तर प्रदेश में स्थापित हुईं।
उन्होंने यह संदेश दिया कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, सेवा का माध्यम हो।
परिवार, व्यक्तित्व और अंशकालीन विवाद
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उनकी पहली पत्नी मलति देवी थीं, जिनकी मृत्यु 2003 में हुई।
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बाद में उन्होंने साधना गुप्ता से विवाह किया, जो 2022 में दिवंगत हो गईं।
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उनका एक पुत्र है — अखिलेश यादव, जो खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
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राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई संघर्षों का सामना किया — पार्टी विवाद, गठबंधन टूटना, विपक्षी दबाव आदि।
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उनके कुछ फैसलों पर विवाद भी हुए; जैसे 1990 में बाबरी मस्जिद आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग, गठबंधन विघटन आदि।
अवसान और विरासत
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मुलायम सिंह यादव का देहांत 10 अक्टूबर 2022 को गुड़गाँव (Gurugram), हरियाणा में हुआ, जब उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर हो गई। उन्हें अस्पताल में अंतिम समय तक रखा गया।
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उनके निधन पर पूरे देश में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
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2023 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया, जो भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
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उनका नाम राजनीति के इतिहास में “Netaji” और “समाजवादी पुरोधा” के रूप में अंकित रहेगा।
निष्कर्ष
मुलायम सिंह यादव का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा है — संघर्ष, समाजसेवा, और सामाजिक न्याय की मिसाल। आपने साधारण पृष्ठभूमि से उठकर, राजनीतिक नेतृत्व, संवेदनशीलता और दृढ निश्चय से कार्य किया। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें सिर्फ याद नहीं करते, बल्कि उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का प्रण लेते हैं।
उनके द्वारा रचित समाजवादी मूल्य, समानता और न्याय की लड़ाई हमें याद दिलाती है कि राजनीति का उद्देश्य सत्ता नहीं, सेवा है। दिवंगत नेता की आत्मा को अति श्रद्धा एवं शांति मिले — जय जगत्, जय समाजवाद।


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