दीपोत्सव 2025 पर विवाद! अखिलेश यादव बोले – क्या यूपी सरकार में अब डिप्टी सीएम के पद खत्म हो गए हैं
🎇 अयोध्या 
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में दीपोत्सव और नई सियासी चिंगारी

अयोध्या में इस साल का भव्य दीपोत्सव 2025 जहां एक ओर रोशनी और उल्लास का प्रतीक बना, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ गया।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल दागा —
“क्या भाजपा सरकार ने अब डिप्टी सीएम के पद खत्म कर दिए हैं?”
📰 विज्ञापन से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, दीपोत्सव को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक बड़ा सरकारी विज्ञापन प्रमुख अखबारों में प्रकाशित हुआ।
इस विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें थीं, लेकिन दोनों डिप्टी सीएम — केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक — गायब थे।
विज्ञापन में केवल कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के नाम शामिल किए गए थे।
यही बात अखिलेश यादव के निशाने का कारण बनी।
🗣️ अखिलेश यादव का ट्वीट और तंज
अखिलेश यादव ने ‘X’ (पूर्व ट्विटर) पर विज्ञापन की फोटो शेयर करते हुए लिखा —
“जनता पूछ रही है कि उत्तर प्रदेश भाजपा सरकार में 'उप मुख्यमंत्री' के दोनों पद समाप्त कर दिए गए हैं क्या? विज्ञापन में कनिष्ठ मंत्रियों के नाम तो दिख रहे हैं लेकिन डिप्टी सीएम साहब लोगों के नहीं... कहीं यहां भी 'हाता नहीं भाता' या 'प्रभुत्ववादी सोच' तो हावी नहीं हो गई?”
“अबकी बार, डिप्टी सीएम बाहर।”
यह ट्वीट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और कुछ ही घंटों में #DeputyCMMissing ट्रेंड करने लगा।
🔥 भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा के नेताओं ने अखिलेश यादव के बयान को राजनीतिक नौटंकी बताया।
उनका कहना है कि दीपोत्सव का विज्ञापन राज्य के आयोजन पर केंद्रित था, न कि व्यक्तिगत प्रचार पर।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे को बेवजह राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।
🏛️ राजनीतिक मायने
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान भाजपा में आंतरिक खींचतान को उभारने की रणनीति भी हो सकता है।
कई बार पहले भी डिप्टी सीएम की भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है, और यह मुद्दा विपक्ष के लिए सियासी हथियार बनता दिख रहा है।
🕯️ दीपोत्सव के बीच सियासी अंधेरा
जहां एक ओर अयोध्या में 11 लाख से अधिक दीयों से सरयू तट जगमगा उठा, वहीं दूसरी ओर राजनीति में ‘डिप्टी सीएम गायब’ का अंधेरा छा गया।
यह विवाद दिखाता है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रतीक और प्रचार किस तरह सियासत का अहम हिस्सा बन गए हैं।
🧭 निष्कर्ष (Conclusion)
अखिलेश यादव का यह बयान दीपोत्सव की खुशियों के बीच राजनीतिक हलचल का नया अध्याय जोड़ गया है।
एक तरफ योगी सरकार भव्य आयोजन के जरिए ‘नए उत्तर प्रदेश’ की तस्वीर दिखाना चाहती है, तो दूसरी ओर विपक्ष हर मौके को सत्ता की नीति पर सवाल उठाने के रूप में देख रहा है।

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