गढ़वा में करमा पूजा के दौरान नदी में डूबने से दो नाबालिग बच्चियों की मौत
झारखंड के गढ़वा जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां केतार थाना क्षेत्र के तली गांव में बुधवार की शाम करमा पूजा के अवसर पर स्नान करने गईं दो नाबालिग बच्चियाँ नदी में डूबकर मौत का शिकार हो गईं। इस घटना से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।
घटना कैसे हुई?
करमा पूजा के अवसर पर तली गांव की कई लड़कियाँ पास की पांडा नदी में स्नान करने गई थीं। यह पूजा झारखंड और आसपास के राज्यों में बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। पूजा की तैयारियों के बीच लड़कियाँ नदी में उतरीं।
अन्य लड़कियाँ सुरक्षित बाहर निकल आईं, लेकिन 8 वर्षीय बुधनी कुमारी और 7 वर्षीय सुमन कुमारी गहरे पानी में चली गईं। देखते ही देखते दोनों पानी में डूब गईं और उन्हें बचाया नहीं जा सका।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलते ही गाँव के लोग बड़ी संख्या में नदी किनारे इकट्ठा हो गए। हर कोई स्तब्ध और दुखी था। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। करमा पूजा जैसे हर्षोल्लास के पर्व पर इस हादसे ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दोनों बच्चियों की मौत डूबने से हुई है। प्रशासन ने गाँववालों से अपील की है कि ऐसे अवसरों पर बच्चों को नदी या तालाब में अकेले स्नान करने न भेजें।
करमा पूजा का महत्व
करमा पूजा आदिवासी समाज का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे भाई-बहन के रिश्ते और सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग उपवास रखते हैं और पूजा-अर्चना के बाद नदी या तालाब में स्नान करते हैं। मगर इस बार पूजा के दिन ही हुई इस त्रासदी ने सभी को झकझोर दिया।
सुरक्षा की कमी उजागर
यह हादसा नदी किनारे सुरक्षा उपायों की कमी को भी उजागर करता है। न तो वहां कोई चेतावनी बोर्ड था और न ही सुरक्षा व्यवस्था। प्रशासन को चाहिए कि पूजा या अन्य अवसरों पर जहाँ बड़ी संख्या में लोग स्नान करते हैं, वहां बचाव दल और सुरक्षा इंतज़ाम किए जाएं।
गाँव में शोक की लहर
दो मासूम बच्चियों की मौत से पूरे गाँव में शोक की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे हादसे से बचने के लिए सरकार और प्रशासन को सतर्कता बरतनी होगी और लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए।
हादसों से बचाव के लिए उपाय
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बच्चों को कभी अकेले नदी-तालाब में स्नान करने न भेजें।
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पूजा या भीड़भाड़ वाले अवसर पर निगरानी ज़रूरी है।
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नदी किनारे सुरक्षा कर्मियों की तैनाती हो।
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लोगों को तैराकी और प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) के बारे में जागरूक किया जाए।
गरवाहा की यह घटना हमें यह संदेश देती है कि धार्मिक आस्था और उत्सव महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सुरक्षा उससे भी अधिक आवश्यक है। प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारी बनती है कि भीड़भाड़ वाले अवसरों पर सुरक्षा इंतज़ाम पुख्ता हों, ताकि भविष्य में ऐसी कोई त्रासदी न हो।
Writer -Ritesh yadav



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