G-Z76GJ3VQ65 google-site-verification=W_bCfRqm-7eEfZBB6vSer72kEdpHDdfo3Yo0LPoPog0 झारखंड खासमहल भूमि नीति 2025: लीज और नवीकरण प्रक्रिया अब होगी आसान, किसानों और आवंटियों को बड़ी राहत - BAHORA NEWS

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झारखंड खासमहल भूमि नीति 2025: लीज और नवीकरण प्रक्रिया अब होगी आसान, किसानों और आवंटियों को बड़ी राहत

 

झारखंड खासमहल भूमि नीति 2025 का ड्राफ्ट कैबिनेट में पेश

रांची। झारखंड में खासमहल भूमि की लीज, चंदोबस्ती, हस्तांतरण और नवीकरण की प्रक्रिया अब आसान और व्यावहारिक बनने जा रही है।
राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग नई खासमहल भूमि नीति-2025 तैयार कर रहा है।

इस नई नीति का उद्देश्य—

  • खासमहल भूखंडों की जटिलताओं को सरल बनाना

  • किसानों और लीजधारकों को राहत देना

  • सरकार को एकमुश्त राजस्व की प्राप्ति कराना

गठित कमेटी ने ड्राफ्ट तैयार कर विभागों को भेज दिया है। विभागों के सुझाव पर संशोधन कर इसे जल्द ही कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा


📌 नई नीति की मुख्य बातें

  • लीज और चंदोबस्ती अब उपायुक्त और आयुक्त स्तर से संभव

  • विभाग की ऑनलाइन निगरानी प्रणाली

  • पूरी प्रक्रिया कंप्यूटराइज्ड होगी

  • सलामी दर (सेस) में भारी कमी

  • खेती, घर और व्यावसायिक उपयोग के लिए आसान प्रावधान

  • सरकार को करोड़ों का राजस्व लाभ


📊 झारखंड में खासमहल जमीन की स्थिति

  • कुल खासमहल भूमि: 583 एकड़ (10 जिलों में)

  • प्रमुख जिले: रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, साहिबगंज, पलामू, सिंहभूम, लातेहार, गिरिडीह, चतरा

  • लीजधारक: 10,500 से अधिक

  • आवासीय श्रेणी के लीजधारक: 9,500

  • लंबे समय से लीज नवीकरण लंबित

  • सरकार को हो रही है करोड़ों की राजस्व हानि


💰 नई नीति में क्या बदलेगा?

वर्तमान में लीज नवीकरण 5% प्रतिवर्ष दर पर होता है, जिससे 30 साल में 150-180% तक खर्च बढ़ जाता है।

लेकिन नई नीति के तहत:

  • आवासीय जमीन पर सिर्फ 1%–1.5% तक सलामी दर

  • अधिकतम 30% तक नवीकरण शुल्क

  • इससे लीजधारकों का बोझ घटेगा


⚠️ चुनौतियां

  • कई जगहों पर जमीन पर अतिक्रमण

  • नवीकरण में देरी से राजस्व हानि

  • कब्जा दिलाना प्रशासन के लिए चुनौती


🏛️ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि – खासमहल जमीन क्या है?

खासमहल जमीन अंग्रेजों के जमाने की देन है। शहरों के विकास के लिए रैयतों और गैर-मजरूआ जमीन को मिलाकर इसे बनाया गया था।
सरकार इसका मालिक है और 80 के दशक से इसे लीज पर देती आ रही है। लेकिन लीज नवीकरण की प्रक्रिया जटिल और लंबी रही है, जिसे नई नीति सरल बनाने वाली है।

Writer -Ritesh yadav 


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