G-Z76GJ3VQ65 google-site-verification=W_bCfRqm-7eEfZBB6vSer72kEdpHDdfo3Yo0LPoPog0 नोबेल पुरस्कार 2025: वैज्ञानिकों ने खोले शरीर के ‘इम्यून प्रहरी’ के राज, जानें कैसे बदलेंगे लाखों मरीजों की जिंदगी - BAHORA NEWS

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नोबेल पुरस्कार 2025: वैज्ञानिकों ने खोले शरीर के ‘इम्यून प्रहरी’ के राज, जानें कैसे बदलेंगे लाखों मरीजों की जिंदगी

नोबेल पुरस्कार 2025 विजेता वैज्ञानिक – शिमोन साकागुची, मैरी ब्रंकॉव और फ्रेडरिक रैम्सडेल

2025 का फिजियोलॉजी और मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार ऐसे वैज्ञानिकों को दिया गया, जिन्होंने हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) का सबसे बड़ा रहस्य उजागर किया। हमारी इम्यून सिस्टम की ताकत इतनी ज्यादा है कि अगर इसे नियंत्रित न किया जाए तो यह हमारे ही शरीर पर हमला कर सकती है। इस वजह से ऑटोइम्यून बीमारियाँ (Autoimmune Diseases) जैसे डायबिटीज़ टाइप-1, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, रुमेटाइड आर्थराइटिस और कई अन्य बीमारियाँ होती हैं।

इन बीमारियों के पीछे का असली रहस्य था – Regulatory T Cells (Tregs) और FOXP3 Gene। यही वो "Immune Watchdogs" हैं जो शरीर की सुरक्षा करते हैं।


🧑‍🔬 किसे मिला नोबेल पुरस्कार?

इस बार तीन वैज्ञानिकों को नोबेल सम्मान मिला –

  1. शिमोन साकागुची (Shimon Sakaguchi) – ओसाका यूनिवर्सिटी (जापान)

  2. मैरी ई. ब्रंकॉव (Mary E. Brunkow) – इंस्टीट्यूट फॉर सिस्टम्स बायोलॉजी, सिएटल (अमेरिका)

  3. फ्रेडरिक जे. रैम्सडेल (Frederick J. Ramsdell) – सोनोमा बायोथेरेप्यूटिक्स, सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका)


🔬 खोज की शुरुआत – 1940 से

वैज्ञानिकों की यह खोज 1940 के दशक में शुरू हुई जब मैनहैटन प्रोजेक्ट (Robert Oppenheimer द्वारा संचालित) के दौरान परमाणु बम पर शोध हो रहा था।

  • विकिरण (Radiation) के असर का अध्ययन करते समय कुछ चूहे मिले जिनकी त्वचा पर परतदारपन (Scaly Skin) था, उनकी प्लीहा (Spleen) और लिम्फ ग्रंथियाँ बहुत बड़ी थीं।

  • यह बीमारी केवल नर चूहों (Male Mice) में पाई गई।

  • वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि यह समस्या X Chromosome पर मौजूद किसी दोषपूर्ण जीन से जुड़ी है।

इन चूहों को "Scurfy Mice" कहा गया और यही इस लंबी वैज्ञानिक यात्रा की नींव बने।


🧩 FOXP3 Gene की खोज

1990 के दशक में वैज्ञानिक ब्रंकॉव और रैम्सडेल ने इस Scurfy Mice पर काम किया। उन्होंने पाया कि इनके शरीर की मौत का कारण था – इम्यून सिस्टम का अपने ही अंगों पर हमला करना

कई सालों की रिसर्च के बाद, उन्होंने उस जीन की पहचान की जो खराब था। इस जीन का नाम दिया गया – FOXP3

  • इंसानों में भी एक दुर्लभ बीमारी होती है – IPEX Syndrome (जो केवल लड़कों को प्रभावित करती है)।

  • शोध से यह साबित हुआ कि IPEX और Scurfy Mice दोनों में एक ही जीन FOXP3 की गड़बड़ी है।


🧑‍🔬 Regulatory T Cells (Tregs) की पहचान

इसी बीच, 1980 के दशक में शिमोन साकागुची ने एक और बड़ी खोज की। उन्होंने पाया कि शरीर में कुछ ऐसे T Cells मौजूद हैं जो अन्य T Cells को नियंत्रित करते हैं।

  • उन्होंने इन सेल्स को नाम दिया Regulatory T Cells (Tregs)

  • इन Tregs का काम है – शरीर को खुद पर हमला करने से रोकना।

  • बाद में साकागुची ने साबित किया कि FOXP3 Gene ही इन Regulatory T Cells को नियंत्रित करता है।


⚙️ रेगुलेटरी T सेल्स का काम

  • इम्यून सिस्टम जब किसी वायरस या बैक्टीरिया से लड़ता है, तब वह बहुत एक्टिव हो जाता है।

  • लेकिन खतरा खत्म होने के बाद उसे शांत करना भी जरूरी है।

  • यही काम करते हैं Regulatory T Cells

  • ये सुनिश्चित करते हैं कि इम्यून सिस्टम अपने ही अंगों, त्वचा या कोशिकाओं पर हमला न करे।


💊 चिकित्सा विज्ञान में क्रांति

  1. ऑटोइम्यून बीमारियों का इलाज

    • अब वैज्ञानिक मरीज के शरीर से Tregs निकालकर प्रयोगशाला में बढ़ा रहे हैं।

    • फिर उन्हें मरीज के शरीर में वापस डालकर बीमारियों पर नियंत्रण पा रहे हैं।

  2. कैंसर थेरेपी

    • ट्यूमर कई बार Tregs की मदद से खुद को इम्यून सिस्टम से बचा लेते हैं।

    • अब वैज्ञानिक ऐसे उपाय खोज रहे हैं जिससे कैंसर सेल्स के आसपास के Tregs को हटाया जा सके।

  3. ऑर्गन ट्रांसप्लांट में मदद

    • पहले नए अंग (Kidney, Liver, Heart) लगाने के बाद शरीर उन्हें अस्वीकार कर देता था।

    • अब Tregs की मदद से अंगों को आसानी से स्वीकार करवाया जा सकता है।


🌍 भविष्य की उम्मीदें

आज से 30-40 साल पहले वैज्ञानिकों को यह तक नहीं पता था कि शरीर खुद को बचाने के लिए इतनी अनोखी व्यवस्था रखता है। लेकिन अब यह खोज मेडिकल साइंस में क्रांति ला चुकी है।

  • ऑटोइम्यून बीमारियों का इलाज आसान होगा।

  • कैंसर के खिलाफ नई दवाइयाँ बनेंगी।

  • अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) और भी सुरक्षित होंगे।

नोबेल समिति ने सही कहा –
👉 "Regulatory T Cells ही शरीर के असली ‘Immune Watchdogs’ हैं।"


📌 निष्कर्ष

2025 का नोबेल पुरस्कार यह साबित करता है कि विज्ञान की खोजें केवल किताबों या प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं। ये खोजें सीधा मानव जीवन को प्रभावित करती हैं और लाखों मरीजों के लिए नई उम्मीदें जगाती हैं।

✅ Writer -Ritesh yadav 

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