लातेहार की दर्दनाक कहानी: सड़क न होने से माँ को बाँस की बनी खाट पर ले गए बेटे, सरकार से लगाई गुहार
![]() |
| Image credit:-nawal gupta twitter handle |
🔴 घटना का दर्दनाक सच
झारखंड के लातेहार जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने विकास के सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है।
पोचरा पंचायत के मरावर गांव के टेंगरा पत्थर टोला में 55 वर्षीय जितनी देवी का पैर टूट गया। परिवार ने तुरंत एंबुलेंस सेवा के लिए कॉल किया, लेकिन गांव तक सड़क न होने के कारण एंबुलेंस नहीं पहुँच पाई।
मजबूर होकर बेटों ने बाँस की खाट (झाँली) बनाई और अपनी माँ को उस पर लिटाकर लगभग 15 किलोमीटर दूर अस्पताल के लिए पैदल यात्रा शुरू की। यह दृश्य जिसने भी देखा, उसका दिल पसीज गया।
🟢 ग्रामीणों की बेबसी
गाँव के लोगों ने बताया कि सड़क सुविधा न होने से हर बार मरीजों को इसी तरह ले जाना पड़ता है।
-
बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं।
-
गर्भवती महिलाओं, बुज़ुर्गों और आपातकालीन मरीजों के लिए यह रास्ता जानलेवा साबित हो रहा है।
-
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
🟡 स्वास्थ्य सेवाओं की पोल
यह घटना सिर्फ सड़क की समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था को भी उजागर करती है।
-
108 एंबुलेंस सेवा कॉल करने के बाद भी गाँव तक नहीं पहुँच पाई।
-
सड़क और एंबुलेंस की कमी के कारण मरीजों की जान जोखिम में रहती है।
-
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार कागजों पर विकास दिखा रही है, जमीन पर नहीं।
🔵 प्रशासन और सरकार पर सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं:
-
आजादी के 75 साल बाद भी गांव सड़क से क्यों नहीं जुड़ा?
-
स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच इतनी मुश्किल क्यों है?
-
योजनाओं का पैसा कहाँ खर्च हो रहा है?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और झारखंड सरकार से सड़क निर्माण की माँग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में बड़ी त्रासदियाँ हो सकती हैं।
🟠 सामाजिक प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर यह घटना वायरल हो गई है।
-
लोग सरकार से सवाल कर रहे हैं।
-
कई लोग मदद की पेशकश कर रहे हैं।
-
इस मुद्दे ने झारखंड की ग्रामीण सच्चाई को उजागर कर दिया है।
🟢 निष्कर्ष
लातेहार की यह घटना हमें याद दिलाती है कि विकास सिर्फ बड़े शहरों में नहीं, गाँवों तक पहुँचना चाहिए।
-
सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य हर नागरिक का हक है।
-
इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि झारखंड के कई गाँव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
जब तक सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा नहीं सुधारती, तब तक इस तरह की दर्दनाक घटनाएँ सामने आती रहेंगी।
“लातेहार की यह तस्वीर सिर्फ एक माँ की मजबूरी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर करारा तमाचा है जो ‘विकास’ का दावा करती है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस गुहार पर ध्यान देती है या फिर ग्रामीणों की आवाज़ फिर से अनसुनी रह जाती है।”
👉 Writer -Ritesh yadav


कोई टिप्पणी नहीं