बिहार विधानसभा चुनाव 2025 | बीजेपी-जेडीयू बनाम तेजस्वी का महागठबंधन
📰 बिहार विधानसभा चुनाव 2025: बीजेपी-जेडीयू बनाम तेजस्वी का महागठबंधन, बदलते समीकरणों के बीच जनता का फैसला
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान हो चुका है। चुनाव आयोग ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में दो चरणों में मतदान होगा – पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा चरण 11 नवंबर को। जबकि 14 नवंबर को वोटों की गिनती होगी और नतीजों का ऐलान किया जाएगा।
इस बार का चुनाव केवल बीजेपी-जेडीयू गठबंधन और तेजस्वी यादव के महागठबंधन के बीच नहीं है, बल्कि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी समीकरण बिगाड़ सकती है। ऐसे में यह चुनाव बेहद रोचक और निर्णायक साबित हो सकता है।
🗳️ बिहार विधानसभा चुनाव की पूरी रूपरेखा
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पहला चरण मतदान: 6 नवंबर 2025 (121 सीटें – पश्चिम और मध्य बिहार)
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दूसरा चरण मतदान: 11 नवंबर 2025 (122 सीटें – सीमांचल, उत्तर और दक्षिण बिहार)
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कुल सीटें: 243 विधानसभा सीटें
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वोटों की गिनती: 14 नवंबर 2025
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चुनावी प्रक्रिया समाप्त: 16 नवंबर 2025
🔑 मुख्य मुद्दे और चुनावी समीकरण
1️⃣ महागठबंधन बनाम एनडीए की सीधी टक्कर
बिहार का राजनीतिक इतिहास बताता है कि नीतीश कुमार बनाम लालू प्रसाद/तेजस्वी यादव का मुकाबला कई दशक से जारी है। इस बार भी भाजपा-जेडीयू का गठबंधन महागठबंधन के खिलाफ उतरेगा।
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महागठबंधन: राजद + कांग्रेस + CPI(ML)
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एनडीए: बीजेपी + जेडीयू
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अन्य दल: जन सुराज, लोजपा (रामविलास)
2️⃣ प्रशांत किशोर की "जन सुराज"
चुनाव में एक बड़ा फैक्टर प्रशांत किशोर का नया प्रयोग हो सकता है। उन्होंने "जन सुराज" के जरिए गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क साधा है। पांच साल पहले चिराग पासवान ने एनडीए से अलग होकर समीकरण बिगाड़े थे, वैसा ही रोल प्रशांत किशोर निभा सकते हैं।
3️⃣ जाति समीकरण और नया कास्ट सर्वे
बिहार चुनावों में जाति हमेशा अहम भूमिका निभाती है। हाल ही में हुए जातिगत सर्वे के बाद माहौल और भी गर्म है।
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तेजस्वी यादव का सहारा "M-Y" यानी मुस्लिम-यादव वोट बैंक है।
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नीतीश कुमार अब भी अति पिछड़ा वर्ग और गैर-यादव ओबीसी पर भरोसा कर रहे हैं।
4️⃣ रोजगार और पलायन
तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी नौकरी, पलायन और महंगाई को सबसे बड़ा मुद्दा बना रही है। उनका कहना है कि 20 साल से एनडीए की सरकार होने के बावजूद बिहार आज भी बेरोजगारी में आगे है।
वहीं, एनडीए सरकार सड़क, बिजली, कानून व्यवस्था और विकास को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताकर जनता से वोट मांग रही है।
5️⃣ चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट विवाद
इस चुनाव से पहले SIR (Special Intensive Revision) हुआ, जिसमें करीब 68.7 लाख वोटरों के नाम हटाए गए और 21.5 लाख नए वोटर जुड़े। इनमें 18-19 साल के लगभग 14 लाख नए मतदाता शामिल हैं।
यानी इस बार चुनाव में लगभग 7.4 करोड़ मतदाता होंगे।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की साख
मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने के खिलाफ कई याचिकाएँ दायर हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट इस पर सुनवाई कर रहा है। लेकिन चुनाव आयोग ने कहा कि "हम राजनीतिक बयानबाज़ी पर प्रतिक्रिया नहीं देते"।
CEC ज्ञानेश कुमार ने दावा किया कि –
👉 "बिहार ने पूरे देश के लिए रास्ता दिखाया है। यहाँ 90 हज़ार से अधिक बूथ लेवल ऑफिसर्स ने मिलकर मतदाता सूची को पारदर्शी बनाया है।"
🔍 चुनावी इतिहास और आज की तस्वीर
🔸 लालू बनाम नीतीश की लड़ाई
2000 के बाद से बिहार की राजनीति हमेशा लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमी है।
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अब लालू यादव बीमार हैं और उन्होंने कमान अपने बेटे तेजस्वी को सौंप दी है।
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नीतीश कुमार भी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन अब भी "सुशासन बाबू" की छवि बरकरार है।
🔸 पलटने वाला बिहार
बिहार की जनता कई बार गठबंधन बदलने वाले नेताओं को भी देख चुकी है। नीतीश कुमार ने दो बार राजद से हाथ मिलाया और फिर अलग हुए। ऐसे में जनता के मन में असमंजस है कि कौन उनके हित में स्थिर सरकार देगा।
🌍 बिहार का चुनाव राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा
बिहार का चुनाव हमेशा से राष्ट्रीय राजनीति का बैरोमीटर माना जाता है।
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भाजपा को उम्मीद है कि अगर बिहार में जीत मिली, तो 2029 लोकसभा चुनाव तक उनकी पकड़ मज़बूत होगी।
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विपक्ष को उम्मीद है कि अगर बिहार में महागठबंधन जीता, तो यह भाजपा के खिलाफ एक बड़ा संदेश जाएगा।
📊 नतीजों का इंतज़ार
बिहार चुनाव के नतीजे 14 नवंबर 2025 को आएंगे।
इस बार का चुनाव बेहद छोटा और तीव्र है – केवल दो चरणों में। आयोग का मानना है कि अब मतदाता जागरूकता, सुरक्षा बलों की उपलब्धता और बेहतर प्रशासनिक तैयारी के चलते चुनाव कम चरणों में कराए जा सकते हैं।
✍️ निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 केवल सत्ता परिवर्तन की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि रोजगार, शिक्षा और विकास को जनता कितना महत्व देती है और जातीय समीकरण का कितना असर बचा है।
बीजेपी-जेडीयू के लिए यह चुनाव अपनी साख बचाने का है, तो तेजस्वी यादव के लिए यह राजनीतिक भविष्य तय करने की जंग होगी। वहीं, प्रशांत किशोर और छोटे दल इस चुनाव में किंगमेकर साबित हो सकते हैं।
✅ Writer -Ritesh yadav


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