शौचालय निर्माण के लिए 12 नहीं 24 हजार रुपये मिले : राज्य सरकार ने केंद्र से की मांग
रांची : स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण और शहरी घरों में शौचालय निर्माण का काम अब तीसरे चरण में प्रवेश करने जा रहा है। वर्ष अप्रैल 2026 से तीसरे चरण की शुरुआत होगी, लेकिन उससे पहले ही राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने साफ कहा है कि 12 हजार रुपये में शौचालय निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस राशि को बढ़ाकर 24 हजार रुपये प्रति शौचालय करने की मांग रखी है।
10 साल से राशि में बदलाव नहीं
मंत्री ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण की योजना वर्ष 2014 में शुरू हुई थी। उस समय प्रत्येक परिवार को शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की राशि मिलती थी। लेकिन 10 साल बीत जाने के बाद भी इस राशि में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब निर्माण सामग्री, मजदूरी और अन्य खर्चे कई गुना बढ़ चुके हैं, तो आखिर 2014 की राशि से 2026 में शौचालय निर्माण कैसे संभव है?
केंद्र से हुई बैठक
मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के साथ बैठक हुई थी। इस बैठक में स्वच्छ भारत मिशन के प्रथम और द्वितीय चरण के काम की समीक्षा की गई और तीसरे चरण की तैयारी शुरू करने को कहा गया।
इसी दौरान राज्य सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि राशि में बढ़ोतरी नहीं की गई तो राज्य सरकार तीसरे चरण के लिए केंद्र से धनराशि स्वीकार नहीं करेगी।
अब तक शौचालय निर्माण की स्थिति
1. प्रथम चरण (2014 - 2020)
-
इस अवधि में 35,73,123 शौचालय बनाए गए।
-
खुले में शौच को रोकने में इस चरण ने बड़ी भूमिका निभाई।
2. दूसरा चरण (2020 - मार्च 2026)
-
इस दौरान 6,27,000 शौचालय का निर्माण हुआ।
-
कई जगह अधूरे निर्माण और अपर्याप्त राशि की समस्या सामने आई।
3. तीसरा चरण (अप्रैल 2026 से शुरू होगा)
-
राज्य में लगभग 3 लाख शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
-
लेकिन इसके लिए राज्य सरकार राशि बढ़ाने की शर्त पर अड़ी हुई है।
क्यों अपर्याप्त है 12 हजार रुपये?
-
ईंट, सीमेंट और सरिया के दाम दोगुना से ज्यादा हो गए हैं।
-
मजदूरी का खर्च भी 10 सालों में लगभग दोगुना हो चुका है।
-
दरवाजे, टंकी, पाइप और छत का खर्च 2014 की तुलना में कई गुना बढ़ा है।
-
परिवहन और सामग्री लाने का खर्च भी महंगा हो चुका है।
वर्तमान स्थिति में 12 हजार रुपये केवल नींव और अधूरे निर्माण में ही खर्च हो जाते हैं। एक सामान्य और उपयोगी शौचालय बनाने के लिए कम से कम 25-30 हजार रुपये की आवश्यकता है।
अधूरे शौचालय से योजना पर असर
स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य खुले में शौच को पूरी तरह खत्म करना है। लेकिन अपर्याप्त राशि के कारण कई ग्रामीण परिवार अधूरे शौचालय छोड़ देते हैं।
-
कहीं दीवार बन गई लेकिन छत नहीं लगी।
-
कहीं दरवाजा और पानी की सुविधा नहीं है।
-
कई शौचालय महज ढांचा बनकर रह गए।
इससे योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
राज्य सरकार का रुख
मंत्री योगेंद्र प्रसाद का कहना है कि राज्य सरकार केंद्र से साफ कर चुकी है कि यदि राशि बढ़ाकर 24 हजार रुपये नहीं दी गई, तो तीसरे चरण में धनराशि नहीं ली जाएगी।
उन्होंने कहा, “जनता की जरूरत और महंगाई दोनों को ध्यान में रखते हुए हमें निर्माण राशि की समीक्षा करनी होगी। अन्यथा अधूरे शौचालय बनेंगे और योजना का मकसद अधूरा रह जाएगा।”
विशेषज्ञों की राय
ग्रामीण विकास विशेषज्ञों का मानना है कि:
-
सरकार को राशि हर 5 साल में महंगाई दर के अनुसार संशोधित करनी चाहिए।
-
निर्माण का पैसा सीधे लाभार्थियों को न देकर सामग्री के रूप में भी दिया जा सकता है।
-
तीसरे चरण की सफलता तभी संभव होगी जब आर्थिक मदद व्यावहारिक हो।
स्वच्छ भारत मिशन ने भारत को खुले में शौच मुक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाया है। लेकिन यदि आर्थिक सहायता वास्तविक लागत के अनुरूप नहीं होगी, तो यह अभियान अधूरा रह जाएगा।
12 हजार रुपये अब पर्याप्त नहीं हैं।
राज्य की मांग जायज़ है कि प्रत्येक शौचालय निर्माण पर 24 हजार रुपये मिलें।
केवल तब ही ग्रामीण और शहरी परिवार बिना वित्तीय बोझ के शौचालय बना पाएंगे और स्वच्छ भारत का सपना साकार हो सकेगा।
Writer -Ritesh yadav


कोई टिप्पणी नहीं