लद्दाख हिंसा: लेह में प्रदर्शन हुआ बेकाबू, 4 की मौत, 100 से अधिक घायल – कर्फ्यू लागू
🔴 लद्दाख हिंसा: चार की मौत, सौ से अधिक घायल
बुधवार, 24 सितम्बर 2025 को लद्दाख के लेह क्षेत्र में राज्य का दर्जा और भूमि व नौकरियों की सुरक्षा की मांग को लेकर शुरू हुआ शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक हो गया। इस झड़प में अब तक 4 लोगों की मौत और करीब 100 लोग घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने हालात काबू से बाहर होने पर लेह में कर्फ्यू लागू कर दिया है।
🔴 प्रदर्शन क्यों भड़का?
लद्दाख को 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला था। तब से यहां के लोग राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा, भूमि और नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहे हैं।
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स्थानीय संगठनों का कहना है कि बिना राज्य के लद्दाख की पहचान और संसाधनों पर खतरा मंडरा रहा है।
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इसी मुद्दे पर सोनम वांगचुक, जो पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, लंबे समय से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
🔴 प्रदर्शन कैसे हुआ हिंसक?
सुबह 11:30 बजे से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने नारेबाजी की। लेकिन दोपहर तक प्रदर्शन हिंसक रूप लेने लगा।
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गवाहों ने बताया कि सैकड़ों युवाओं ने पथराव शुरू कर दिया।
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बीजेपी कार्यालय और एक पुलिस वाहन को आग के हवाले कर दिया गया।
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पुलिस ने हालात काबू करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने लाइव फायरिंग भी की, जिससे कई लोगों की जान गई।
🔴 प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
लेह के एएसपी रिग्ज़िन सांगडुप ने बताया –
“चार प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है और 30 लोग घायल हुए हैं। वहीं पुलिस बल के 60-70 जवान भी चोटिल हुए हैं।”
गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि –
“यह स्पष्ट है कि भीड़ को श्री सोनम वांगचुक के उकसावे से भड़काया गया। सरकार लगातार लद्दाख और कारगिल के प्रतिनिधियों से बातचीत कर रही थी, लेकिन कुछ राजनीतिक लोग प्रगति से खुश नहीं थे।”
🔴 अगली बैठक और वार्ता
गृह मंत्रालय के अनुसार,
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सरकार और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच पहले से बातचीत चल रही थी।
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आरक्षण, भाषा अधिकार और भर्ती प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर सहमति बनी थी।
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अगली औपचारिक बैठक 6 अक्टूबर को तय है।
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लेकिन विरोधियों का आरोप है कि सरकार केवल “वक्त टाल रही है” और ठोस निर्णय लेने से बच रही है।
🔴 लद्दाख की मांगें
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पूर्ण राज्य का दर्जा – ताकि अपनी विधानसभा और निर्णय लेने का अधिकार मिले।
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छठी अनुसूची में शामिल करना – जनजातीय अधिकारों और स्थानीय भूमि की सुरक्षा के लिए।
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नौकरियों में स्थानीय आरक्षण – बाहरी लोगों के रोजगार लेने से रोक।
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भाषा और संस्कृति की सुरक्षा – बौद्ध और मुस्लिम बहुल क्षेत्र की पहचान बचाना।
🔴 हिंसा का व्यापक असर
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लेह में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है।
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इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
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बाजार, स्कूल और सरकारी दफ्तर बंद हैं।
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सेना और अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं।
🔴 विपक्ष और जनता की प्रतिक्रिया
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह “लद्दाख के लोगों की वास्तविक मांगों को अनसुना कर रही है।”
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दिल्ली, जम्मू और कारगिल में भी छोटे स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए।
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सोशल मीडिया पर #LadakhStatehood और #LehProtest ट्रेंड कर रहे हैं।
🔴 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
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5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटा गया –
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जम्मू-कश्मीर (विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश)
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लद्दाख (बिना विधानसभा का केंद्र शासित प्रदेश)
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तब से लद्दाख में लगातार आंदोलन जारी हैं।
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फरवरी 2024 में भी दिल्ली और लद्दाख में बड़े प्रदर्शन हुए थे।
🔴 आगे क्या?
विशेषज्ञ मानते हैं कि लद्दाख की स्थिति “शांति से संवाद” के बिना और बिगड़ सकती है।
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यदि सरकार और आंदोलनकारी आपसी सहमति नहीं बनाते तो आने वाले समय में और बड़े आंदोलन देखने को मिल सकते हैं।
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सुरक्षा एजेंसियां हालात पर कड़ी नजर रख रही हैं।
लद्दाख का यह आंदोलन केवल एक राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि लोगों की पहचान, संस्कृति और भविष्य की सुरक्षा का सवाल बन चुका है। लेह में हुई हिंसा ने साफ कर दिया है कि अब यह मसला और टालना मुश्किल होगा। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे संघर्ष की दिशा तय करेगी।
Writer -Ritesh yadav


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