अमेठी में पीएम आवास योजना घोटाला: पहली किस्त मिलते ही महिला प्रेमी संग हुई फरार
अमेठी (उत्तर प्रदेश)। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंदों को मदद पहुंचाना है, लेकिन कई बार इनके गलत इस्तेमाल की घटनाएं सामने आ जाती हैं। ताजा मामला अमेठी जिले के रेभा गांव का है, जहां एक विधवा महिला प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की पहली किस्त मिलने के बाद अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई। इस घटना ने न केवल गांव में सनसनी फैला दी है बल्कि प्रशासन को भी सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है।
शादी और पारिवारिक स्थिति
रेभा गांव की रहने वाली उत्तरा कुमारी की शादी 2013 में राम सजीवन से हुई थी। दोनों का जीवन सामान्य रूप से चल रहा था और उनके तीन बच्चे भी हैं। लेकिन 2023 में बीमारी के चलते राम सजीवन की मौत हो गई। पति की मौत के बाद महिला ने प्रधानमंत्री आवास योजना और विधवा योजना में आवेदन किया।
जांच के बाद आवेदन स्वीकार कर लिया गया और हाल ही में उत्तरा कुमारी के खाते में 40 हजार रुपये की पहली किस्त भेजी गई।
40 हजार मिलते ही फरार
ग्रामीणों के अनुसार, किस्त मिलते ही महिला ने अपने तीन बच्चों को साथ लिया और गांव के ही एक युवक के साथ घर छोड़कर चली गई। पिछले कई महीनों से उसके घर पर ताला बंद है और उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
गांव के लोगों ने दावा किया कि महिला का लंबे समय से उस युवक के साथ प्रेम प्रसंग था। पति की मौत के बाद दोनों का रिश्ता और गहराता चला गया। परिवार और ग्रामीणों ने कई बार विरोध किया, यहां तक कि पुलिस से भी शिकायत की गई। लेकिन महिला ने किसी की बात नहीं मानी।
प्रशासनिक कार्रवाई शुरू
महिला के फरार होने की खबर प्रशासन तक पहुंचते ही अधिकारियों ने नोटिस जारी किया और जांच के आदेश दिए। पीएम आवास योजना की राशि मकान निर्माण के लिए जारी की जाती है। ऐसे में महिला का पैसा लेकर गायब हो जाना सीधे तौर पर योजना के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
विभाग ने साफ किया है कि यदि महिला पकड़ी जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और रकम की वसूली भी की जाएगी।
गांव में चर्चा और सवाल
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी है। लोग सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी पर सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि लाभार्थियों पर समय-समय पर निगरानी की जाती तो शायद इस तरह की घटना सामने नहीं आती।
सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग
प्रधानमंत्री आवास योजना का मकसद गरीब और बेघर लोगों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि लाभार्थी योजना की राशि का इस्तेमाल मकान बनाने की बजाय निजी रिश्तों या अन्य कारणों में कर दे, तो योजना की सार्थकता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लाभार्थियों की स्थिति की लगातार जांच और निगरानी जरूरी है। इससे योजनाओं का पैसा सही जगह इस्तेमाल होगा और दुरुपयोग की घटनाओं पर रोक लगेगी।
अमेठी का यह मामला केवल एक परिवार का नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। जिस पैसे से एक विधवा महिला और उसके बच्चों को छत मिलनी चाहिए थी, उसी पैसे के बाद उसने गांव और परिवार छोड़ दिया।
अब प्रशासन की चुनौती है कि महिला को ढूंढकर रकम की वसूली की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत बनाया जाए।


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