G-Z76GJ3VQ65 google-site-verification=W_bCfRqm-7eEfZBB6vSer72kEdpHDdfo3Yo0LPoPog0 झारखंड के महान क्रांतिकारी बिनोद बिहारी महतो की जीवनी | समाजसेवा और संघर्ष की गाथा - BAHORA NEWS

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झारखंड के महान क्रांतिकारी बिनोद बिहारी महतो की जीवनी | समाजसेवा और संघर्ष की गाथा

 

महान क्रांतिकारी बिनोद बिहारी महतो जी की जयंती पर श्रद्धांजलि"
Image credit:-hemant Soren twiter handal 

झारखंड की माटी के लाल: बिनोद बिहारी महतो

झारखंड की धरती हमेशा से वीरों, क्रांतिकारियों और समाज सुधारकों की जन्मभूमि रही है। इन्हीं महान विभूतियों में एक नाम है स्वर्गीय बिनोद बिहारी महतो, जिन्होंने न केवल झारखंडी समाज की आवाज़ को बुलंद किया बल्कि सामाजिक न्याय और शिक्षा के क्षेत्र में भी अमिट योगदान दिया।

उनका जीवन संघर्ष और सेवा का अद्भुत उदाहरण है। उनकी सोच, उनके विचार और उनका त्याग आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करता है।


प्रारंभिक जीवन और जन्म

बिनोद बिहारी महतो का जन्म 23 सितंबर 1934 को धनबाद जिले के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनका जीवन शुरू से ही संघर्षों से भरा हुआ था। साधारण किसान परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने बचपन से ही शिक्षा और समाज सेवा के महत्व को समझा।

उनके पिता चाहते थे कि बेटा पढ़-लिखकर समाज में बदलाव लाए। यही कारण था कि बिनोद बिहारी महतो ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी शिक्षा पूरी की।


शिक्षा और प्रारंभिक संघर्ष

उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और वकालत के क्षेत्र में कदम रखा। एक वकील के रूप में उन्होंने गरीब, आदिवासी और मजदूरों की आवाज़ को न्यायालय तक पहुँचाया। उन्होंने हमेशा समाज के कमजोर तबके की लड़ाई को अपनी लड़ाई माना।

वकालत करते हुए उन्होंने देखा कि किस प्रकार आदिवासी समाज और मजदूर वर्ग शोषण का शिकार है। यहीं से उनके भीतर एक आंदोलनकारी और क्रांतिकारी नेता का जन्म हुआ।


राजनीतिक जीवन की शुरुआत

बिनोद बिहारी महतो ने राजनीति में कदम रखकर समाज के दबे-कुचले वर्गों को न्याय दिलाने का बीड़ा उठाया। वे हमेशा इस बात के पक्षधर रहे कि झारखंड की पहचान और अस्मिता को बचाने के लिए अलग राज्य का निर्माण जरूरी है।

वे झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने मजदूरों, किसानों और आदिवासियों को एकजुट करने का काम किया।


झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना

बिनोद बिहारी महतो, शिबू सोरेन और ए के राय जैसे नेताओं के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह पार्टी झारखंड राज्य की मांग को लेकर बनी और धीरे-धीरे यह आंदोलन एक जनांदोलन में बदल गया।

उन्होंने नारा दिया –
“हमारा झारखंड, हमारी पहचान।”


मजदूरों और आदिवासियों की आवाज़

धनबाद और आसपास के इलाकों में कोयला मजदूरों की हालत बहुत दयनीय थी। बिनोद बिहारी महतो ने मजदूर आंदोलन को मजबूत किया और उनकी आवाज़ सरकार तक पहुँचाई।
उन्होंने आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को सम्मान दिलाने के लिए लगातार संघर्ष किया।


शिक्षा के क्षेत्र में योगदान

बिनोद बिहारी महतो ने समझा कि बिना शिक्षा के समाज आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने शिक्षा को समाज की प्रगति का सबसे बड़ा हथियार माना।
उनकी स्मृति में बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (BBMKU), धनबाद की स्थापना की गई, जो आज हजारों छात्रों को शिक्षा प्रदान कर रहा है।


झारखंड आंदोलन और उनका बलिदान

झारखंड आंदोलन को गति देने के लिए उन्होंने जन-जागरण किया। वे चाहते थे कि झारखंड को अलग राज्य का दर्जा मिले और यहां के लोगों को सम्मान, अधिकार और पहचान मिले।
उनका पूरा जीवन इसी आंदोलन और समाज सेवा को समर्पित रहा।


विचारधारा और सोच

बिनोद बिहारी महतो समाजवादी विचारधारा से प्रभावित थे। वे समानता, सामाजिक न्याय और भाईचारे के पक्षधर थे।
उनका मानना था कि –

  • समाज का विकास तभी संभव है जब गरीब और अमीर के बीच की खाई कम हो।

  • शिक्षा ही असली आज़ादी है।

  • आदिवासी और झारखंडी समाज की अस्मिता को बचाना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।


निधन

बिनोद बिहारी महतो का निधन 1989 में हुआ। उनका जाना झारखंड आंदोलन और समाजवादी राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति थी।
लेकिन उनकी विचारधारा और उनके संघर्ष आज भी हर झारखंडी के दिल में जिंदा हैं।


आज के परिप्रेक्ष्य में उनकी प्रासंगिकता

आज जब झारखंड राज्य का निर्माण हो चुका है, तब भी बिनोद बिहारी महतो के विचार हमें याद दिलाते हैं कि असली विकास तभी संभव है जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुँचे।
उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है और उनकी जयंती समाज को एकजुट होने का अवसर देती है।

स्व. बिनोद बिहारी महतो केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि एक आंदोलनकारी, समाज सुधारक और सच्चे झारखंडी थे। उन्होंने अपना जीवन झारखंड की अस्मिता, शिक्षा और मजदूरों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया।

उनकी जयंती पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उनके विचारों को आगे बढ़ाएँगे और समाज में समानता, शिक्षा और न्याय की ज्योति जलाए रखेंगे।


👉 Writer -Ritesh yadav 

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