भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग टोबगे का अयोध्या धाम दौरा: श्रीरामलला और महादेव के किए दर्शन
अयोध्या, सितम्बर 2025:
भारत और भूटान के रिश्तों को और गहरा करने वाला एक ऐतिहासिक क्षण आज देखने को मिला, जब भूटान के प्रधानमंत्री दशो त्शेरिंग टोबगे अपनी पत्नी के साथ अयोध्या धाम पहुंचे। उन्होंने यहाँ भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु श्रीरामलला सरकार के दर्शन कर धार्मिक अनुष्ठान किए।
श्रीरामलला सरकार के दर्शन
भूटान के प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी ने सबसे पहले प्रभु श्रीरामलला सरकार के दर्शन किए। मंदिर परिसर में उन्हें विशेष पूजा-अर्चना के लिए आमंत्रित किया गया। इस दौरान मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका स्वागत किया और उन्हें विधिवत पूजा करवाई।
प्रधानमंत्री ने अपने अनुभव को “आध्यात्मिक और अविस्मरणीय” बताते हुए कहा कि यह भारत-भूटान के सांस्कृतिक रिश्तों का प्रतीक है।
श्रीराम दरबार के दर्शन
रामलला सरकार के दर्शन के बाद वे मंदिर परिसर में स्थित श्रीराम दरबार पहुंचे।
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यहां उन्होंने प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमाओं के दर्शन किए।
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मंदिर में उपस्थित साधु-संतों ने उन्हें श्रीरामायण और रामचरितमानस की महत्ता के बारे में बताया।
प्रधानमंत्री की पत्नी ने भी आरती और पूजा में भाग लिया।
कुबेर टीला पर जलाभिषेक और आरती
भूटान के प्रधानमंत्री का अगला पड़ाव कुबेर टीला रहा।
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यहाँ उन्होंने महादेव का जलाभिषेक किया।
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साथ ही पारंपरिक विधि से आरती अर्पित की।
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इस अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठा।
यह क्षण श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास रहा क्योंकि पहली बार भूटान के प्रधानमंत्री को इतनी नजदीक से पूजा करते देखने का अवसर मिला।
अयोध्या में स्वागत का दृश्य
प्रधानमंत्री त्शेरिंग टोबगे और उनकी पत्नी का अयोध्या पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया।
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स्थानीय लोगों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों और फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया।
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साधु-संतों ने उन्हें आशीर्वाद दिया।
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मंदिर प्रशासन ने विशेष गाइडेड टूर की व्यवस्था की।
भारत-भूटान रिश्तों का प्रतीक
त्शेरिंग टोबगे का यह दौरा केवल धार्मिक महत्व का ही नहीं था, बल्कि भारत और भूटान के बीच सांस्कृतिक एवं कूटनीतिक संबंधों को भी दर्शाता है।
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भूटान को हमेशा भारत का करीबी मित्र देश माना गया है।
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अयोध्या दौरे से यह संदेश गया कि दोनों देशों के रिश्ते न केवल राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक आधार पर भी मजबूत हैं।
सोशल मीडिया पर चर्चा
भूटान पीएम के इस दौरे की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए।
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#BhutanPMInAyodhya और #AyodhyaTemple जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
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लोगों ने इसे भारत की आध्यात्मिक शक्ति और सांस्कृतिक कूटनीति का उदाहरण बताया।
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कई यूज़र्स ने लिखा कि अयोध्या का यह दृश्य भारत की धार्मिक विविधता और वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
अयोध्या धाम हिंदू आस्था का केंद्र है।
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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का दर्शन हर भक्त का सपना होता है।
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विदेशी अतिथि जब यहां आते हैं तो यह संदेश जाता है कि अयोध्या अब न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए आस्था और संस्कृति का केंद्र है।
भूटान प्रधानमंत्री का जलाभिषेक और आरती करना इस बात को और पुख्ता करता है।
भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग टोबगे और उनकी पत्नी का अयोध्या दौरा भारत-भूटान मित्रता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।
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उन्होंने श्रीरामलला सरकार, श्रीराम दरबार और कुबेर टीला पर दर्शन-पूजन कर न केवल अपनी श्रद्धा व्यक्त की, बल्कि यह संदेश भी दिया कि अयोध्या की पवित्रता विश्व स्तर पर स्वीकार्य और आदरणीय है।
यह दौरा आने वाले समय में दोनों देशों के बीच और भी घनिष्ठ संबंधों का आधार बनेगा और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
Writer -Ritesh yadav


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