भू-राजस्व संहिता 2025: सुधार या किसानों की पुश्तैनी ज़मीन पर खतरा? पूरी पड़ताल
11 जुलाई 2025 को बीजेपी सरकार ने भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक 2025 पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून भूमि सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इससे अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगेगी और किसानों को नामांतरण (Mutation) के लिए महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
लेकिन विपक्ष और किसान संगठनों का आरोप है कि यह कानून असल में “किसानों की पुश्तैनी जमीन छीनने का रास्ता” खोलता है।
नया कानून क्या कहता है?
भू-राजस्व संहिता 2025 के कुछ प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
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अवैध प्लॉटिंग पर रोक – अब बिना अनुमति के प्लॉट काटकर बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
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Mutation प्रक्रिया सरल – रजिस्ट्री होते ही नामांतरण अपने आप दर्ज हो जाएगा।
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हस्तांतरण की प्रक्रिया आसान – ज़मीन की खरीद-बिक्री अब तेज़ और सरल होगी।
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डिजिटल रिकॉर्ड अनिवार्य – सभी जमीन का डेटा ऑनलाइन अपडेट होगा, जिससे पारदर्शिता आएगी।
पहले क्या होता था?
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किसान रजिस्ट्री करवाने के बाद भी Mutation (नामांतरण) के लिए महीनों तहसील और राजस्व विभाग के चक्कर काटते थे।
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भ्रष्टाचार, दलालों की भूमिका और फाइल अटकाने का खेल चलता था।
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कई बार किसानों को रिश्वत दिए बिना Mutation की प्रविष्टि नहीं होती थी।
विवाद क्यों खड़ा हुआ?
हालाँकि सरकार इसे “सुधार” बता रही है, लेकिन विपक्ष और किसान संगठनों की चिंताएँ अलग हैं:
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कॉरपोरेट को फायदा – Mutation प्रक्रिया आसान होने से बड़े कॉरपोरेट और बिल्डर्स बिना अड़चन जमीन खरीद सकेंगे।
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किसानों की पुश्तैनी जमीन खतरे में – दबाव और लालच में किसान जमीन बेचने को मजबूर होंगे।
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भूमि अधिग्रहण का डर – सरकार और कंपनियाँ बड़े पैमाने पर अधिग्रहण कर सकती हैं।
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ग्रामीण परिवार प्रभावित – जिनकी आजीविका पूरी तरह जमीन पर निर्भर है, उनका भविष्य असुरक्षित होगा।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि –
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इससे अवैध प्लॉटिंग और बिचौलियों पर रोक लगेगी।
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डिजिटल रजिस्ट्रेशन और Mutation से पारदर्शिता बढ़ेगी।
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किसान को अपनी जमीन का मालिकाना हक तुरंत मिलेगा।
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भूमि लेन-देन तेज़ और भ्रष्टाचार मुक्त होगा।
किसानों और विपक्ष का पक्ष
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किसानों का कहना है कि कानून की आड़ में कॉरपोरेट कंपनियों को जमीन खरीदना आसान हो जाएगा।
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विपक्ष ने इसे “ज़मीन लूटने का कानून” बताया है।
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आंदोलन की चेतावनी दी गई है कि यदि कानून वापस नहीं लिया गया तो किसान सड़कों पर उतरेंगे।
विशेषज्ञों की राय
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कानूनी विशेषज्ञ: Mutation का आसान होना एक सुधार है, लेकिन साथ में किसानों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान होने चाहिए।
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अर्थशास्त्री: अगर यह कानून बिना सुरक्षा प्रावधानों के लागू हुआ तो भूमि का कॉरपोरेटाइजेशन तेजी से होगा।
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कृषि विशेषज्ञ: छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, जिनके पास पहले ही सीमित जमीन है।
भविष्य की स्थिति
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अगर कानून सही तरीके से लागू हुआ तो भ्रष्टाचार और देरी खत्म हो सकती है।
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लेकिन अगर कॉरपोरेट और बड़े बिल्डर्स को खुली छूट मिल गई तो आने वाले समय में किसान जमीनविहीन हो सकते हैं।
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यह कानून किसानों की जिंदगी बदल देगा – अब यह समय बताएगा कि बेहतर के लिए या बुरे के लिए।
भू-राजस्व संहिता 2025 पर बहस अभी जारी है।
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समर्थक इसे भूमि सुधार की दिशा में क्रांतिकारी कदम बता रहे हैं।
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विरोधी इसे किसानों की पुश्तैनी जमीन के लिए सबसे बड़ा खतरा मान रहे हैं।
असली सच्चाई इसके कार्यान्वयन में छिपी है। यदि सरकार किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है तो यह कानून ऐतिहासिक हो सकता है, अन्यथा यह किसानों के लिए संकट का कारण बन सकता है।
Writer -Ritesh yadav


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