छत्तीसगढ़ के जशपुर में दिल दहला देने वाली घटना: बेटे ने कुल्हाड़ी से मां की हत्या की, शव के पास बैठ गाता रहा गाना
▪️ परिचय
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। यहां एक युवक ने मानसिक अस्थिरता के चलते अपनी ही मां की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या कर दी। इतना ही नहीं, हत्या के बाद आरोपी शव के पास बैठकर गाने गाता रहा। यह दिल दहला देने वाला दृश्य गांव के लोगों ने अपनी आंखों से देखा। पुलिस को आरोपी को पकड़ने में कई घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी।
▪️ घटना का विवरण
यह घटना जशपुर जिले के बृंदरभद्र गांव की है। आरोपी युवक का नाम जीत राम यादव (28 वर्ष) है। मंगलवार सुबह लगभग 5 बजे उसने अपनी मां गुलाबाई (59 वर्ष) पर कुल्हाड़ी से हमला किया। अचानक और लगातार किए गए वारों से महिला की मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद युवक वहीं पास में बैठकर गाने गाता रहा और आसपास रेत में खेलता भी रहा। जब ग्रामीणों ने यह दृश्य देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
▪️ पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलने पर जशपुर पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन आरोपी की मानसिक स्थिति खराब होने के चलते वह पुलिस को भी कुल्हाड़ी दिखाकर डराने लगा। उसे काबू करने में पुलिस को लगभग चार घंटे का समय लग गया। आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया और कुल्हाड़ी भी जब्त कर ली गई।
जशपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) शशिमोहन सिंह ने बताया कि आरोपी पिछले दो साल से मानसिक रोग से जूझ रहा था और उसका इलाज स्थानीय वैद्य (बाइगा) के पास चल रहा था।
▪️ आरोपी की मानसिक स्थिति
पुलिस जांच में सामने आया कि जीत राम यादव की मानसिक हालत लंबे समय से ठीक नहीं थी। परिवारवालों ने उसका इलाज आधुनिक चिकित्सा पद्धति से कराने की बजाय पारंपरिक तरीके से कराया। इससे उसकी स्थिति और बिगड़ गई।
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या मानसिक बीमारियों को समाज अभी भी उतनी गंभीरता से नहीं ले रहा जितनी जरूरत है?
▪️ सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू
भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी है। गांवों और कस्बों में अब भी मानसिक रोगों को “भूत-प्रेत” या “ऊपरी चक्कर” समझ लिया जाता है। ऐसे में लोग चिकित्सकीय उपचार की बजाय तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं।
अगर जीत राम यादव का समय पर सही इलाज कराया जाता, तो शायद उसकी मां की जान बच सकती थी।
▪️ कानूनी पहलू
भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत, किसी भी व्यक्ति द्वारा हत्या करना धारा 302 के तहत दंडनीय अपराध है। लेकिन अगर यह साबित हो जाए कि अपराधी मानसिक रोगी है और उसे अपने कर्म की समझ नहीं थी, तो उसे धारा 84 IPC (Insanity Defence) के अंतर्गत कुछ राहत मिल सकती है।
इस मामले में भी पुलिस जांच कर रही है कि हत्या के समय युवक की मानसिक स्थिति किस हद तक असामान्य थी।
▪️ निष्कर्ष
जशपुर की यह घटना केवल एक अपराध कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए एक गंभीर संदेश है।
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मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना घातक साबित हो सकता है।
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परिवार और समाज को ऐसे मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए।
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समय पर इलाज से कई त्रासदियों को रोका जा सकता है।
छत्तीसगढ़ के जशपुर में हुई इस घटना ने एक मां-बेटे के रिश्ते को खून से रंग दिया और पूरे समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर हमारी लापरवाही कितनी खतरनाक साबित हो सकती है।
Writer -Ritesh yadav
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