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🚨 बिरबल में धड़ल्ले से हो रही है खाद-यूरिया की काला बाजारी, किसान बेहालBirbal Urea Black Marketing, खाद यूरिया काला बाजारी,



🚨 बिरबल में धड़ल्ले से हो रही है खाद-यूरिया की काला बाजारी, किसान बेहाल


📌 समस्या क्या है?

बिरबल क्षेत्र के किसान खाद-यूरिया की किल्लत से जूझ रहे हैं। सरकारी दुकानों पर यूरिया उपलब्ध नहीं है, लेकिन वही यूरिया ब्लैक मार्केट में दुगुने-तिगुने दामों पर बेचा जा रहा है।


  • तय दाम ₹266 प्रति बैग के बजाय ₹500–₹600 में बेचना।

  • किसान घंटों लाइन में लगते हैं, लेकिन स्टॉक खत्म होने की घोषणा कर दी जाती है।

  • बाद में वही बैग ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से किसानों को महंगे दाम पर बेचा जाता है।


🗣️ किसानों की परेशानी

  • खेती का समय बिगड़ रहा है – समय पर खाद न मिलने से बोआई और सिंचाई प्रभावित।

  • कर्ज़ में डूबे किसान महंगी खाद खरीदने को मजबूर हैं।

  • जिनके पास पैसे नहीं हैं, उनकी फसल सूखने की कगार पर है।

  • किसान संगठनों का कहना है – “यह सीधे-सीधे किसानों के साथ धोखा है।”


🔍 काला बाजारी कैसे चल रही है?

  • खाद डिपो से यूरिया गायब दिखाया जा रहा है।

  • माफिया और बिचौलिए स्टॉक पकड़कर महंगे दामों पर बेच रहे हैं।

  • प्रशासन और सप्लाई विभाग निगरानी करने के बजाय चुप बैठे हैं।


🚨 प्रशासन पर सवाल

ग्रामीणों और किसान नेताओं का कहना है कि यह धंधा स्थानीय अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत से ही चल रहा है।

  • अगर कड़ी कार्रवाई हो, तो काला बाजारी तुरंत बंद हो सकती है।

  • लेकिन अभी तक सिर्फ कागज़ी जांच हो रही है।


📊 इसका असर

  • खेती की लागत बढ़ रही है।

  • किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो रही है।

  • गाँवों में गुस्सा और आक्रोश बढ़ रहा है।

  • लंबे समय तक यह समस्या रही तो अन्न उत्पादन घट सकता है


✅ निष्कर्ष

बिरबल में चल रही खाद-यूरिया की काला बाजारी किसानों की मेहनत और भविष्य से खिलवाड़ है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि –

  • सख़्त छापेमारी करें,

  • दोषियों पर मुकदमा दर्ज करें,

  • और किसानों को समय पर उचित दाम पर खाद उपलब्ध कराएँ

अगर यह नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में किसानों का आक्रोश सड़क पर उतर सकता है।

WRITER:-RITESH YADAV 


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