75-साल की उम्र सीमा पर साफ़गोई, बयानबाज़ी और सामाजिक संदेश — Mohan Bhagwat के ताज़ा विचार
परिचय
26 से 28 अगस्त, 2025 तक आयोजित RSS की शताब्दी व्याख्यान श्रृंखला 'एक सौ वर्ष: नए क्षितिज' में, सर संघचालक Mohan Bhagwat ने कई विवादास्पद विषयों पर अपने विचार दिए। 29 अगस्त को प्रकाशित प्रमुख खबरों में उनकी वर्तमान सोच का समृद्ध एवं संतुलित पहलू सामने आया है, जिसमें उन्होंने उम्र सीमा, सांप्रदायिकता, सामाजिक समरसता और जनसंख्या नीति जैसे विषयों पर दमदार बातें की हैं।
1⃣ उम्र सीमा पर स्पष्टता — "कोई 75-साल का नियम नहीं"
कुछ वक्त पहले इस तरह की खबर चली थी कि RSS में या बीजेपी नेतृत्व में 75 साल की उम्र को “सेवानिवृत्ति” की सीमा माना जाता है। मगर Bhagwat ने इसे पूर्णतः खारिज करते हुए कहा, "मैंने कभी नहीं कहा कि मैं या कोई और 75 पर रिटायर हो जाए|
उनके अनुसार— “हम सभी स्वयंसेवक हैं, हमें संगठन का आदेश मिलने पर काम करना होता है—यदि मैं 80 साल का भी हो जाऊँ और संघ ने आदेश दिया तो काम करना होगा” (।
यह स्पष्ट संदेश है कि उम्र से किसी कदर निर्णयों या भूमिका में बदलाव की आवश्यकता नहीं समझी जाती, बल्कि कार्य की प्रतिबद्धता और संगठनात्मक जरूरत ही आधार हैं।
2⃣ संघ-बीजेपी संबंधों में पूर्ण सहयोग
कुछ चर्चाओं में RSS और बीजेपी के बीच संभावित विचारों में विभेद की बात उड़ी थी। Bhagwat ने इसे साफ कर दिया कि “कोई मनभेद नहीं है” — RSS सलाह दे सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय बीजेपी का अधिकार है। उन्होंने दोहराया कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच भी समन्वय सुचारू है और कोई टकराव नहीं है।
3⃣ “इस्लाम भारत का अभिन्न हिस्सा” — सांप्रदायिकता पर नजर
Bhagwat ने स्पष्ट किया कि इस्लाम भारत में है और रहेगा। “जो लोग सोचते हैं कि इस्लाम भारत से गायब हो जाएगा, वे हिंदू चिंतन से दूर हैं। उन्होंने कहा कि “अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर घुसपैठ होने पर उससे मुसलमान समुदाय को भी चोट होती है” और इसलिए रोजगार पहले देश के नागरिकों को मिलना चाहिए ।
यह वाणी एक ऐसे संदेश की कार्यवाही है जो धर्मनिरपेक्ष समावेश और संतुलित विचारधारा पर आधारित है।
4⃣ 'Hum Do, Humāre Teen' — जनसंख्या और नई सोच
Bhagwat ने परिवारों को तीन बच्चों तक सीमित रखने का सुझाव दिया—2.1 की प्रतिस्थापन दर के आधार पर इसे व्यावहारिक माना जा सकता है, लेकिन तर्क के अनुसार 2.1 बच्चों का गणितीय नहीं, बल्कि व्यवहारिक अर्थ यह है कि “दो के बाद तीन अच्छे है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि तीन भाई-बहन ही 'ego management' सीखते हैं और परिवार जीवन में असंतुलन नहीं होता।
यह विचार एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है — जनसंख्या नियंत्रण केवल संख्या तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार में मानसिक परिपक्वता और सामाजिक स्थिरता को भी जोड़ लेता है।
5⃣ सामाजिक संदेशों और परंपरा का मिलन
Bhagwat ने यह भी कहा कि "हिंदू राष्ट्र" का मतलब कभी धमकाना या डराना नहीं हो सकता, बल्कि इसका उद्देश्य सभी के लिए समान न्याय सुनिश्चित करना है । उन्होंने यह भी निर्दिष्ट किया कि त्योहारों के दौरान यदि कोई मांसाहारी खाना उत्सव की भावना को ठेस पहुंचाता है तो थोड़े दिनों के लिए संयम अपनाना 'सामान्य विवेक' का हिस्सा है ।
इनके अलावा, उन्होंने कहा कि RSS स्वयं आंदोलनों में शामिल नहीं होगा जैसे कि काशी-मथुरा का मामला, लेकिन स्वयंसेवक अपनी स्वतंत्र राय से जुड़ सकते हैं, क्योंकि ये हिंदू मस्तिष्क में महत्वपूर्ण विषय हैं ।
निष्कर्ष
आज की प्रमुख खबरें ये दिखाती हैं कि Mohan Bhagwat का रुख एक संतुलित और विचारशील राह का है — जहां उम्र, नेतृत्व, धर्म, जनसंख्या, और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर स्पष्ट, तार्किक और प्रगतिशील दृष्टिकोण सामने आता है।
उनके विचार यह संकेत देते हैं कि RSS की शताब्दी कार्यक्रमों के माध्यम से संगठन आधुनिकता और भारतीय चेतना के बीच संतुलन बनाए रखना चाहता है। उनकी सोच केंद्रित है—परंपरा में परिष्कृत नए विचारों को पनाह देने पर।
writer:-Ritesh yadav


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